कोई यूं ही नहीं चला जाता

Teachers of Bihar

कोई यूं ही नहीं चला जाता

आइए संकल्प लें और अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करें ,ताकि समाज में हो रहे सुसाइड जैसी घटनाएँ रुक  सके

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है  समाज का दायित्व बनता है कि  खराब परिस्थितियों में भी  एक दूसरे का सहयोग प्रदान करें । टूटते हुए आत्मबल को संबल प्रदान करें । मानसिक तनाव हो या  एकाकीपन से  पीड़ित व्यक्ति को हौसला अफजाई करें, उसका साथ दें।

 प्राचीन काल में सभी लोग संयुक्त परिवार में रहा करते थे एक समाज से जुड़े होने के कारण अपनी बातों को समाज के बीच रखते थे उन समस्याओं का समाधान  लोगों से मिलजुलकर हो  जाता था। यदि किसी के साथ कोई मुश्किल है सफलता असफलता होती थी तो लोग उसे सहयोग और प्रोत्साहन दिया करते थे लेकिन अब बदलते दौर बदलते परिवेश में समाज टूटा परिवार टूटा और व्यक्ति एकाकी होता गया और  होता जा रहा है। स्थिति ऐसी है कि किसी  के बुरे हालात या असफलता को देखकर उसका उपहास उड़ाया जाना पीठ पीछे कमेंट बुराई और हतोत्साह करने की जो समाज के कुछ लोगों के द्वारा कुत्सित परिपाटी बन गई है ।
वह कहीं न कहीं डिप्रेशन, असफलता,  एकाकीपन  से गुजर रहे व्यक्ति  का नुकसान कर देती है।

जिंदगी सबको प्यारी होती है कोई नहीं चाहता है कि अपनी मौत हो जाए लेकिन सब कुछ जानने समझने और दूसरों को नसीहत देकर भी यदि कोई आत्महत्या कर ले सुसाइड कर ले तो जरूर कोई न कोई उसके साथ ऐसी बाते  रही होगी जो उसे भीतर ही भीतर खाये जाए और वह किसी से शेयर नहीं कर सके।

यदि कोई बात जो दिल को चोट पहुंचा दे ,भीतर भीतर तोड़ दे या फिर एकाकीपन का शिकार होने पर मजबूर कर दे तो वैसे  में अपने बातों को अपने हितपरिवार मित्र  या  किसी से शेयर कर दो।

इतना भी नहीं कर सको तो सादे कागज पर लिख कर फाड डालो और गम को  बाहर निकाल दो ।
ऐसा कर पाते हैं तो मैं समझता हूं कि आत्महत्या जैसी दुखद घटना का पुनरावृति किसी के द्वारा नहीं होगी।

समाज मित्र और बुद्धिजीवी वर्ग का भी दायित्व बनता है कि यदि कोई टेंशन में हो एकाकीपन में जी रहा हो ऊपर से खुश लेकिन भीतर ही भीतर खोखला होता जा रहा हो तो उस व्यक्ति को आप आत्मबल प्रदान करें। और उसका साथ दें कि वह कुछ अपनी बातों को कहे तो उसे सुने। पता नहीं डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति कौन सी अपनी बात को शेयर कर खुद को हल्का होना और जिंदगी जीना चाहता हो। उसकी बातों को जरूर सुने अन्यथा अक्सर आदमी भीतर ही भीतर घुटता है और एक समय ऐसा आता है इस तरह के दुख परिणाम देखने सुनने को मिलते हैं।

और जो चला जाता है लौटकर नहीं आता ।

जाने के बाद फिर खूब समीक्षा कर लीजिए खूब लंबी चौड़ी बातें हो जाए उसका कोई लाभ नहीं।
   🙏🌹 मुकेश जी🌹🙏

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